दिल्ली की सडकों से गुजरते हुए ये बातें दिमाग में चलने लगती हैं कि " दिल्ली है दिलवालों की "......पर लगता नही है ...क्यूंकि अगर ऐसा होता तो जरुर ही कहीं ना कहीं कोई दिलवाली मिल ही जाती......लेकिन अच्छे -अच्छे का गफलत और दिलवाला बुखार मिनट में उतर जाता है ..कभी खुबसूरत सी बदमिजाज सी कन्याएं उतर देती हैं तो कभी कभी पुलिसिया डर... खैर बात करते हैं दिल कि और दिलवालों कि..तो आप किसी से भी पूछ लीजिये कि फलां आदमी का घर बता सकते हैं ,..तो उनको खूब अच्छे से जानने वाले लोग भी आपके पूछना खतम होने से पहले ही कहेंगे..हमे नही पता ..अब भाई इतना डेयरिंग काम तो बड़े दिलवाले ही कर सकते हैं ना !! और तो और किसी मुह्ह्ले में जाके पूछिये ये कौन सा मुहल्ला है तब भी भी वही जवाब मिलेगा हमे नही पता ...एक आध बार तो रिस्क लेके हमने ये पूछा कि आपके पिता जी का नाम क्या है, इस बार भी हमारे सवाल से पहले वही जवाब मिला !!! धन्य है दिल्ली !.... .. आपको एड्रेस जानना है तो कहीं भी किसी रिक्शे वाले से ना पूछें वरना ऐसे बता देगा कि आनन्द विहार से से लक्ष्मीनगर जाना है तो आपको पहले द्वारका जाके वहीं ए मेट्रो पकड़ना होगा !! हो गया फिर तो दिल्ली का सैर ...हालाँकि मोबाइल में मैप और दस रूपये में बिक्कता हुआ मैप थोडा बहुत हेल्प जरुर करता है ....................हाँ एक आध ऑटो वाले या फिर बाहर से आये लोग आपको एड्रेस बता सकते हैं या फिर किसी दुकान से अगर दस रूपये से अद्धिक का सामान खरीदें तो वो भी !!!!कहने का मतलब की यहाँ रहना है तो मजबूत दिल का होना जरूरी है ताकि अपने दिल में कोई एड्रेस छिपा के रहा जा सके या कहीं किसी मुह्ह्ल्ले में बगल के घर में रहने वाले मिश्र जी को ढूंढने के लिए कई मिसराइनों से पंगा लेना पड़े !!
तो जी अब इतने मजबूत दिल वालों का शहर है तभी तो कहा जाता है दिल्ली है दिलवालों की !!!!